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Satyajit Swain

Classics

4  

Satyajit Swain

Classics

*मेरी चाहत*

*मेरी चाहत*

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431


मुझे चाहत नहीं उन ख़ुशियों की

जिसमें अपनें नहीं हों 

हर रात जिन्हें देख़, ख़ुश में होता, 

वो मीठे सपनें नहीं हों।


मुझे चाहत नहीं उस महल की 

जिसकी दीवार में पिता का प्यार ना हो 

हरपल मेरी फ़िकर जो करती, 

उस प्यारी माँ का वो दुलार ना हो।


मुझे चाहत नहीं उस आसमान की 

जिसमें अकेले उड़ना हो 

हर मंजिल बस सुना पड़ा हो, 

दुःखी मन लेके फ़िर मुड़ना हो।


मुझे चाहत है उस छोटे घर की 

जहाँ साथ मेरे अपनें हों 

हर रात सो कर भी जागूँ जिनके लिए, 

ऐसे मीठे वो सपने हों।


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