STORYMIRROR

GOPAL RAM DANSENA

Abstract Inspirational

4  

GOPAL RAM DANSENA

Abstract Inspirational

मेरी अस्मत

मेरी अस्मत

1 min
253

 कानूनी किताबों में ही रह गया मेरी अस्मत


बेचते खरीदते कई रूप में

एक पन्ना लिखा गया हर युग में


मोल होता तौल होता

मुझे देख नियत डांवाडोल होता


कोई और जन्म देता कोई लिखता मेरी किस्मत

कानून किताबों में ही रह गया मेरी अस्मत


दांव पेंच दुनियां का देख लो

चलो एक किताब लिख लो


कांटों भरी राह में, मैं आगे बढ़ रही हूं

अंधेरी कोठरी में मैं भविष्य गढ़ रही हूं


मिट्टी का मैं एक लोई बाबुजी

खेलो, रौंदो ,रखो मुझे काबू जी


मैं भीगी हूं आंसुओं के प्रसार में

क्या मेरा हक नहीं इस संसार में।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract