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Priya Neet Shukla

Tragedy

5.0  

Priya Neet Shukla

Tragedy

मेरे सपने

मेरे सपने

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सपने मेरे भी थे

उड़ान मुझे भी भरना था।


होकर निर्भीक,

खुले आसमान में।


नहीं जानती,

कहाँ से आया ?

ये पिंजरा।


क्या ये मेरा नसीब था ?

या छीनी मैंने

खुद अपनी आजादी.....।।.


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