STORYMIRROR

AVINASH KUMAR

Abstract

3  

AVINASH KUMAR

Abstract

मेरे मन का पंछी

मेरे मन का पंछी

1 min
210

मेरे मन का पंछी कुछ गाना चाहे

तुझमें ही मुस्कराना चाहे

जज्बा ठौर ठिकाना चाहे

एक बार घर कर लें मुझमें

फिर तेरा ही हो जाना चाहे


राह कठिन हो चाहे जितनी

मन मंजिल को पाना चाहे

दूर रहे चाहे जितना प्रेमी

दिल उसी का हो जाना चाहे


सपनों में जो रहा है अबतक

हकीकत में उसको पाना चाहे

जो दूर हुई किसी कारण

उसको दिल जीवन में लाना चाहे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract