मेरे माता पिता मेरे गुरु और भगवान
मेरे माता पिता मेरे गुरु और भगवान
एहसान उनके अनगिनत हैं मुझ पर,
जिनसे मैंने ये जन्म था पाया।
अपनी नींदों को गंवाकर,
जिन्होंने मुझको था संभाला।
कितने जतनों से उन्होंने,
मुझको बोलना चलना सिखाया,
हाथ में कलम पकड़कर मुझको,
लिखना पढ़ना घर में सिखाया।
मुझको इस जीवन का हरदम,
सच्चा पाठ उन्होंने सिखाया।
रिश्तों की मर्यादा को भी,
उन्होंने ही था मुझको सिखाया।
अपनी नींदों को गंवाकर,
मुझको नेक इंसान बनाया।
अपनी खुशियों को लुटाकर,
मेरे जीवन को उन्होंने संवारा।
उनके त्यागों को कैसे मैं,
भूलूं जो मेरा आदर्श हैं।
मेरे माता पिता ही तो मेरे,
प्रथम गुरु और भगवान हैं।
