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Hazra Shaikh

Romance

5.0  

Hazra Shaikh

Romance

मेरे जज़्बात

मेरे जज़्बात

1 min
307


अधूरी ज़िन्दगी में थोड़े बाकी हैं हम 

थोड़ी है खुशियाँ और ज़्यादा है ग़म। 


अन्दाज़-ए-बयाँ हम होंठो से ना कह सके तो 

दिल ने कलम का सहारा ले लिया। 


मेरी आवाज़ आज मेरे

कलम की स्याही बन गई 

अल्फाज़ों को बिखेरा पन्नों पर

इस क़दर की कहानी बन गई। 


कागज़ के हर पन्नों पर

लिखे जज़्बात है 

इसे रूह (आत्मा) से महसूस कर

ये रूह (आत्मा) के अल्फाज़ है। 


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