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writerneha neha

Tragedy Others

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writerneha neha

Tragedy Others

मेरे चेहरे का श्रृंगार हुआ

मेरे चेहरे का श्रृंगार हुआ

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मेरे चेहरे का श्रृंगार हुआ

तेज़ाब से मुझ पर वार हुआ

खुब चिल्लाई मैं,

पर वही बार - बार हुआ

दस पन्द्रह सिगरेटो की आग अब मुझ पर थी।

कभी आँख कभी पैर पूरे बदन पर संहार हुआ।

उन नरभक्षियों के द्वारा मेरी नस-नस पर वार हुआ

सुलग रहे थे अरमान मेरे सुलग रही थी रूह 

खुद पर अफ़सोस भी हुआ और फिर

 हुआ मुझे गर्व अपने समाज

और अपने कटघरे पर,

कि वहाँ खड़े कुछ चरित्रवान

हाथों में कैमरा लिए देख रहे थे रंगमंच का तमाशा.........



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