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Ishan Ahmad

Abstract

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Ishan Ahmad

Abstract

मेरा जीवन

मेरा जीवन

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मुश्किलों से पार पाना

आदमी की हो नीयत


फिर कोई भी हो अड़ंगा

ठोकरों से यूँ हटेगा


जैसे पर उड़ जाते हैं

एक झोंके से पवन के।


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