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Mr. Akabar Pinjari

Abstract

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Mr. Akabar Pinjari

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*मेरा दोस्त*

*मेरा दोस्त*

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जिसे देखकर मैं खो जाऊं,

मेरे दिल के राज सुनाऊं,

मेरी आंखों का तारा है,

सबसे प्यारा है मेरा दोस्त।


उसके खातिर खुशियां ठुकराऊं,

गम को भी अपने आंगन लाऊं,

मेरे जीवन का उजियारा है,

सबसे न्यारा है मेरा दोस्त।


दूर होकर भी पास होता है,

हर वक्त वह मेरा खास होता है,

धड़कनों में उसका एहसास होता है,

गुणों से भरा है मेरा दोस्त।


समंदर में नाव-सा,

धूप में छांव-सा,

शहरों में गांव-सा

दर्पण के भाव-सा है मेरा दोस्त।


किताबों के पन्नों में,

खेतों के गन्नों में,

आटे के छन्नों में,किताबों के पन्नों में,

खेतों के गन्नों में,

आटे के छन्नों में,

जहां देखूं वहां मिल जाता है मेरा दोस्त।


मेरी बहकी यादों में,

मेरी सारी फरियादों में,

मेरे हर सच्चे-झूठे वादों में,

वह बुद्धू होता ही है, मेरा दोस्त।






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