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Pragya Dugar

Abstract

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Pragya Dugar

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मौसम बहार का

मौसम बहार का

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सूखे रेगिस्तान में सावन सा,

मौसम कोई मनभावन सा, 


सूखे फूल में खुशबु जैसे,

लगता है सब कुछ ख्वाब सा,


जीवन में आयी है नयी बहार, 

आय है, मीत जो आप सा, 


अब खिलीं हैं जीवन में कलियाँ,

असर है बसंत की बहार सा,


नया मोड़ है जिंदगी में, 

समां है बेकरार सा, 


सूखे रेगिस्तान में आया है, 

जैसे मौसम अब की बहार का !


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