STORYMIRROR

Pragya Dugar

Abstract

3  

Pragya Dugar

Abstract

दो पल का प्यार

दो पल का प्यार

1 min
348

ये मासूम चेहरा, हर बार जादु चला देता है,

जितना भूलना चाहा, उतना पास बुला लेता है,


यह सच है, सारी उम्र हमारे साथ नहीं रह सकते,

पर उनका ये चेहरा हर सच्चाई भूला देता है। 


कुछ रिश्ते बस दो पल के होते हैं,

ये मन कहाँ इस बात को मान पाता है,


बहुत मुश्किल है खुद को आप से अलग करना,

इस लिए अब तो हमने खुद को समझाना ही छोड़ दिया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract