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Pragya Dugar

Abstract

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Pragya Dugar

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कोरोना के कुछ साइडइफेक्ट

कोरोना के कुछ साइडइफेक्ट

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कल तक जिन सड़कों पर भीड़ समाती नहीं थी,

वही सड़कें आज देखो कितनी खली है,

देख कर लगता है, पतझड़ का हो मौसम,

और बिना पत्तों के डाली है,


लगता ही नहीं, ये वही शहर है,

जहा बिना बात के लोग टहलने निकलते थे,

एक-एक सड़क पर

दस-दस चाट पकोड़ी के ठेले लगते थे,

 

हर कोई आज अपने घर में कैद है,

पर जाने कैसे मन को कुछ चैन

जो काम किसी के बस का नहीं था,


'कोरोना' ने वो कर के दिखाया है,

जिस इंसान को खुद अपने लिए वक़्त नहीं था,

आज उसने तसल्ली से

अपनों के साथ वक़्त बिताया है,

 

वही इंटरनेट, वही फ़ोन हाथ में है पर,

उसमे टाइम पास करने का मन नहीं करता,

अपने घर की खिड़की और कोनों में झांक कर,

दिन ज्यादा सुहाना लगता है


मन  में थोड़ी बेचैनी ही सही,

पर अपनों साथ ये

मुश्किल वक्त भी आसान लगता है।


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