Jyoti Verma
Abstract
न शोहरत पे इतराए, न दौलत पे इठलाए
हम तो बस ,उसकी रज़ में मस्त चलते आए।
इस स्वतंत्र प...
दुनिया मुट्ठी...
इल्ज़ाम
मैं
घर
मुलाकात
जीवन की दौड़ ...
तजुर्बा
एक प्रश्न स्व...
Masti
मनाएं दीवाली मिलजुल कर मिले आनंद इस जीवन का। मनाएं दीवाली मिलजुल कर मिले आनंद इस जीवन का।
पर जब भी झांकोगे दिल में एक बाप के वही मुस्कुराती हुई मिल जाएंगी बेटियाँ। पर जब भी झांकोगे दिल में एक बाप के वही मुस्कुराती हुई मिल जाएंगी बेटि...
समय कुछ लगेगा, मिलेगा मगर हल, रखें मन में धीरज, मिलेगा मृदु फल। समय कुछ लगेगा, मिलेगा मगर हल, रखें मन में धीरज, मिलेगा मृदु फल।
मैं खुश हूं कल को भूल कर, अपने आज में खुश हूं। मैं खुश हूं कल को भूल कर, अपने आज में खुश हूं।
ऐसी कविता बन जाऊँ मैं ऐसी कविता बन जाऊँ। ऐसी कविता बन जाऊँ मैं ऐसी कविता बन जाऊँ।
अजय ,अमर, अविनाशी आत्मा का #ईश समागम आधार बन जाती है मृत्यु। अजय ,अमर, अविनाशी आत्मा का #ईश समागम आधार बन जाती है मृत्यु।
संत हुए ज्ञानी हुए मेरे भारत सा गुरु न हुआ संत हुए ज्ञानी हुए मेरे भारत सा गुरु न हुआ
ज्वाला प्रतिशोध की हम बुझाएं पिलाएं प्रेम की सबको हम प्याली। ज्वाला प्रतिशोध की हम बुझाएं पिलाएं प्रेम की सबको हम प्याली।
हम सबको साथियों देना है साथ सामूहिक यात्रा का ! हम सबको साथियों देना है साथ सामूहिक यात्रा का !
यारो जल जाएगा जब यह देश गौतम - गांधी का भूल जाएंगे संदेश। यारो जल जाएगा जब यह देश गौतम - गांधी का भूल जाएंगे संदेश।
इतिहास के पन्ने है सहनशीलता पर बने आकृति है एक जाति के समृद्धसाली ऐश्वर्य है। इतिहास के पन्ने है सहनशीलता पर बने आकृति है एक जाति के समृद्धसाली ऐश्वर्य है।
तुमने क्यों बसाया है गाँव- घर बारूद के ढेर पर। तुमने क्यों बसाया है गाँव- घर बारूद के ढेर पर।
कुदरती खूबसूरत सा होता माँ का आशीर्वाद। कुदरती खूबसूरत सा होता माँ का आशीर्वाद।
राष्ट्रीयता इसको मिले, यही हिंद उपहार। आओ सब मिलकर भरें, इसमें नव संस्कार। राष्ट्रीयता इसको मिले, यही हिंद उपहार। आओ सब मिलकर भरें, इसमें नव संस्कार।
वो कहतीं हैं उम्र हो चुकी है तुम्हारी अब ईश्क करना सही नहीं है । वो कहतीं हैं उम्र हो चुकी है तुम्हारी अब ईश्क करना सही नहीं है ।
चलों अपनी बातें खुद से करते हैं कैसी कसम कस। चलों अपनी बातें खुद से करते हैं कैसी कसम कस।
मौत से आंँखें मिलाना चाहता हूं। डर ज़माने का मिटाना चाहता हूं। मौत से आंँखें मिलाना चाहता हूं। डर ज़माने का मिटाना चाहता हूं।
सच लिखा है कलम ने तो गीत सरहद पार भी गाए जाएंगे। सच लिखा है कलम ने तो गीत सरहद पार भी गाए जाएंगे।
जहाँ ना होता था कोई जाति धर्म,भेद-भाव, लड़ते-झगड़ते फिर लगते खेलने भूलकर हर घाव। जहाँ ना होता था कोई जाति धर्म,भेद-भाव, लड़ते-झगड़ते फिर लगते खेलने भूलकर हर घाव...
क़ाफ़िए में फर्क़ हो तो रहने दीजिए ‘अभि’ एक ही मगर तेरा रदीफ़ ‘होना चाहिए’। क़ाफ़िए में फर्क़ हो तो रहने दीजिए ‘अभि’ एक ही मगर तेरा रदीफ़ ‘होना चाहिए’।