STORYMIRROR

Sangeeta Aggarwal

Inspirational

4  

Sangeeta Aggarwal

Inspirational

मैं

मैं

2 mins
388

उम्र के चालीस वर्ष पार कर गई हूँ मैं 

जीवन का काफी लम्बा अरसा गुजार चुकी हूँ मैं।

इस अरसे मे बहुत कुछ खोया बहुत कुछ पाया

कभी किसी लम्हा रुलाया कभी रुला के हंसाया।

कई अपने छूटे कितने अपने हमसे बिन बात रूठें

जो छूट गये उन्हे दिल पर पत्थर रख हमने भुलाया।

जो रूठ गये उन्हे आगे बढ़ इक बार तो हमने मनाया

कभी जिंदगी ने हमें कभी हमने जिंदगी को आजमाया।

अब हूँ उम्र के उस पड़ाव पर जब एक ठहराव चाहिए

जिस्मानी जरूरत से उपर उठ किसी दोस्त का साथ चाहिए।

कल जो थी जरूरतें उन्हे कही पीछे छोड़ आई हूँ।

कल थी जो चाहते उनसे भी मुंह मोड़ आई हूँ।

अब ना वो चाहते , ना उमंग ना जूनून है ।

जिंदगी मे जो पाया मैने उसका सुकून है।

पति , बच्चो घर संसार से ऊपर उठ गई हूँ मैं

थोड़ा खुद के लिए भी जीना सीख रही हूँ मैं।

अब किसी ओर के लिए मैं नही खुद को सजाती

अब खुद ही देख आइना मैं खुद ही हूँ लजाती ।

खुद के बनाये एक खोल से बाहर निकल रही हूँ मैं

सच्ची झूठी तारीफों मे अंतर करना सीख रही हूँ मैं।

कभी अनमनी हो जाती कभी खुद पर हूँ इतराती

कभी उदासी घेर लेती कभी बेवजह खुश हो जाती।

जिंदगी के नए अनुभव से गुजर रही हूँ मैं

कभी हद से ज्यादा अपनी परवाह करती हूँ मैं

कभी कभी लापरवाह भी बन रही हूँ मैं।

माना अपने अंदर कुछ बदलाव से जूझ रही हूँ मैं।

पर अपनी पहचान भी कही ढूंढ रही हूँ मैं।

जिंदगी का नही भरोसा ये जानती हूँ मैं 

इसलिए मरने से पहले खुद के लिए जी रही हूँ मैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational