मैं नारी हूं
मैं नारी हूं
पूजा हूं, अर्चना हूं
मैं इस जग की भवानी हूं।
नारी हूं, उजियारी हूं
मैं पावन नित बहती गंगा हूं।
उषा हूं, धरा हूं
मैं वट की शीतल छाया हूं।
कविता हूं, कहानी हूं
मैं आदिशाक्ति जगदंबा हूं।
काली हूं, दुर्गा हूं
मैं रणभूमि की महाकाली हूं।
देवी हूं, नायिका हूं
मैं हर महाकाव्य की गाथा हूं।
गीता हूं, मीरा हूं
मैं अनुसुइया मरियम सीता हूं।
स्त्री हूं, संगिनी हूं
मैं कृष्ण दीवानी राधा हूं।
शबरी हूं, अहिल्या हूं
मैं प्रभु श्रीराम की पूजारन हूं।
जननी हूं, अन्नपूर्णा हूं
मैं ईश्वर की निर्मित शक्ति हूं।
माता हूं, बेटी हूं
मैं सम्मान की अधिकारी हूं।
- सुमन मीना (अदिति)
लेखिका एवं साहित्यकार
