STORYMIRROR

Meena Mallavarapu

Inspirational

4  

Meena Mallavarapu

Inspirational

मैं ज़िंदा हूं

मैं ज़िंदा हूं

1 min
364

      मैं ज़िंदा हूं यह क्या कम है

       माना दुनिया में ग़म पर ग़म है

       हज़ारों यहां देने वाले ज़ख़्म हैं

       मरहम लगाने वाले यहां कम हैं

       रोशनी हर ओर-मेरे लिए तम है

      अपनों को खोने का ग़म है

       रिश्तों के टूटने का मातम है

       हर ओर तूफ़ान का आलम है

       अंधेरों का ही जैसे परचम है

       ढूंढे रूह सुकून की सरगम है

       घेरे हर ओर मंझधार

      मेरी नैया खाए हिचकोले

      रिश्तों की गरिमा का सार,

       उसका राज़,ज़िंदगी जाने कब खोले

       मालूम है इतना मगर मुझे-इस पार

       सृष्टि की हज़ारों नेमतें बाहें खोले

       करतीं हमारा इंतज़ार

   जिंदगी की गरिमा है सृष्टि की दरियादिली से

  खूबियां और ख़ामियां बार बार कहती हैं मुझसे आंसू नहीं,

फ़रियाद नहीं, शिकवा ,शिकायत नहीं

ज़िंदगी की अपेक्षा नहीं आस नहीं ज़रा भी तुझसे

   जिंदगी से हरगिज़ न पेश आना बेदिली से

     ज़िंदा हैं, ज़िंदगी है, ख़ुशनुमा अहसास है

      लगाएं गले इसे, हों शुक्रगुज़ार,

      यह ज़िंदगी है,बहुुत ही खास है!

  



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational