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Meenakshi Suryavanshi

Romance

4  

Meenakshi Suryavanshi

Romance

मैं और तुम

मैं और तुम

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मैं हृदय की पीड़ा सी  

तुम इश्क सुहाने से

मैं प्रेम में खोयी सी 

तुम मस्त मौला से

मैं भावना में बही सी 

तुम भाव के स्वप्न से।


मैं पौधो में कांटो सी

तुम प्रेमरस कलिका से

मैं प्रेम में विरह सी

तुम विकल के तपन से

मै तेरे बिना अपूर्ण सी

तुम मेरे बिना पूर्ण से।


मैं उलझी हुई सवालो सी

तुम सुलझे हुए उत्तरो से

मैं विज्ञान के रसायन सी

तुम हिन्दी के श्रृंगार रस से

मैं संधि विच्छेद सी 

तुम समास विग्रह से।


मैं समर्पित फूल सी

तुम प्रेम के पुजारी से

मैं धरा पर चलती सी 

तुम गगन में उड़ते से

मैं किनारे की लहर सी 

तुम अथाह सागर से ।


मैं हूं एक शूल सी

तुम हो एक फूल से

मैं अधूरी सांस सी

तुम हो पुरे जीवन से

मै प्रेम की दिवस सी

तुम प्रेम के शर्वरी से।


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