STORYMIRROR

Meenakshi Suryavanshi

Others

4  

Meenakshi Suryavanshi

Others

महफ़िल

महफ़िल

1 min
342

हम तो तेरी महफिल में

यूँ ही चले आये थे

तुझसे मिलने की मगर

अदब से चाह तो थी

हम क्या थे कैसे थे

मुझे तो नहीं था पता

शायद तुम्हें थी खबर

हम खुशनसीबों में थे

जिन्हें तुम्हारी मिली नज़र

ना अपना कोई करिश्मा था

ना अपना कोई जतन

ना जाने क्यों तूने मुफ्त में दे दी

मुझे अपना प्रेम रतन

बाद में जाना तू ऐसा ही है

हाँ तू ऐसा ही है

मुफ़्त में बाँटता है

तू यह रूहानियत

तेरी मौज का तो तू ही जाने

तेरे इसी मौन से

भरती रहती है झोली सबकी

कौन ना सदके जाये

तेरी इस दरियादिली पर

हम भी शामिल हुये जाते हैं

इन महफिल में

कोई हैरानी की बात तो नहीं......


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन