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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Inspirational

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Inspirational

मातृशक्ति की अनुपम गाथा (सुश्री हीरा बा)

मातृशक्ति की अनुपम गाथा (सुश्री हीरा बा)

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हीरा बा, तुम हो जीवन सरलता दीप

तपस्या में लीन संतान से गहन प्रीत

तुम्हारे कदमों से गूँजे धैर्य का संगीत

तुम्हारे हाथों ने थी सँवारी,कठिन रीत


अभावों के अंधेरे में उम्मीद रेखा खींची

बिन अक्षर ज्ञान , बेल शिक्षा की सींची

घर के छोटे से कोने में, संसार बसाया

प्रेम और समर्पण ने,बंधन मुक्त कराया


अरुणोदय लाली के पहले, तुम जगती 

प्रातः की बेला में, भजन प्रेम के भरती 

हाथों की मेहनत, हर पल गाथा कहती

नरसी मेहता के भजनों को मन गुनतीं


संघर्षों के बीच भी, शांति छाया रहती

दूसरों के जूठे बर्तन माँज पैसे कमाती

फिर भी सदैव मुस्कुराते हुए थीं जीती

संवेदनशीलता, सेवा भाव को सृजतीं


हर पक्षी वजीव पर ममता की निशानी

तुम्हारे आशीष से ,संतान बनी इंशानी

सादगी सिखा स्वाभिमान ईमानभक्ति

बिना किसी मोह के,श्रद्धा ईश्वर शक्ति 


आत्मा में बसे ईश्वर तो अहम् होये चूर

मातृशक्ति का तप,सोने-गहनों से दूर

अन्न की बर्बादी कभी वे देख न पातीं

इस उम्र में भी अपने काम खुद करतीं


स्वस्थ्य शरीर में काम अच्छे कर पायेंगे 

उनकी दूरदृष्टि सोच पे हैरान रह जायेंगे

न शिकवा न कोई अपेक्षा मिले सिद्धिसे

काम करें बुद्धि से जीवन जियें शुद्धि से


ममत्व से दूसरों के सुख में सुख पाना

बन संवेदी दूसरों के दुख में दुखी होना 

संवेदनशीलता, सेवा का अनोखा रूप

हर पक्षी,जीव पर, ममता की लगे धूप


ईश अगाध आस्था,अंधविश्वास से दूर 

कहानी में बसा रहे मातृभाव का नूर

जीवन यात्रा,अनमोल प्रेरणा खजाना

मोदी सी संतान पति दामोदर ने माना


सादगी भरे स्नेह, ने दिखाई सच्ची राह

ममता में बसती, जीवन की सुंदर चाह

त्याग और तप से सजी, है यह अनुपम

हीरा बा,वास्तव में तुम श्रेष्ठता की उद्गम।



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