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Mahak Garg

Abstract

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Mahak Garg

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मातृभूमि

मातृभूमि

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चुनरी उसकी कश्मीर से

कन्याकुमारी है

विश्वराजा की वह राजकुमारी है

दुनिया में सबसे न्यारी है

मुझे मेरी मातृभूमि प्यारी है


खाने को हमें अन्न देती है

पीने को शुद्ध जल देती है

रहने को सारी जगह देती है

मुझे मेरी मातृभूमि प्यारी है


हम इसे चोट भी पहुँचाते हैं

हम इसका अपमान भी करते हैं

ये कभी शिकायत न करती है

मुझे मेरी मातृभूमि प्यारी है


हमारा जीवन इसी से है

हमारा मरण इसी से है

सुविधा सब इसी से है

मुझे मेरी मातृभूमि प्यारी है


इसी से मेरा नाम है

इसी से मेरी पहचान हैं

इसी से मेरा सम्मान है

मुझे मेरी मातृभूमि प्यारी है।


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