मातृभूमि
मातृभूमि
हर कोई सुनाएं मातृभूमि की गाथाएं
मातृभूमि की माटी से आओ तिलक लगाएं
जिस की रज में लोट-लोट कर बड़े हुए
घुटनों के बल सरक-सरक कर खड़े हुए
वीर भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद ने यहांं जन्म लिया
फांसी के फंदे को हंसकर गले लगा लिया
सरहद पर वीरों ने खुद को न्योछावर कर दिया
वीरों की इस पावन पावन धरती को आओ शीश नवाए
इस माटी में जन्म लिए
यह सोच हम फूले न समाए
मातृभूमि की इस पावन धरती को
आओ चलो तिलक लगाएं
इस माटी में जन्मे
यह हम अपना सौभाग्यय समझे
राम, कृष्ण नेे जन्म लिए
झांसी की रानी,
महाराणा प्रताप ने भी यहांं जन्म लिया
है यह देवभूमि
है यह कर्म भूमि
है गुजारिश मेरी रब से
जब जब जन्म मिले इस धरती पर
भारत माँ की गोद में खुद को पाएं
इस मिट्टी पर जन्मे
यह सोच हम इतराए
है यहां गंगाा की बेला
चिड़ियों ने डाला डेरा
है यहां अनेकता में एकता
हर कोई सुनाएं मातृभूमि की गाथाएं
इस पावन मिट्टी की आओ तिलक लगाएं
इस माटी में जन्मेे
यह सोच हम फूले न समाए।
