purnima mandal
Inspirational
जीवन के अनुभव
शायरी में ढलते हैं।
शायरी सीखी नहीं
जाती कहीं से
यह तो वो हुनर है
जो दर्द की स्याही से
और जज्बातों की
कलम से लिखी
जाती है।
शायरी
कालिदास की लेखनी पर थी, माँ शारदे की कृपा अनंत। कालिदास की लेखनी पर थी, माँ शारदे की कृपा अनंत।
इस दुराचार के कलयुग में अब तुमको भी चलना होगा। इस दुराचार के कलयुग में अब तुमको भी चलना होगा।
जवानी यू ही निकल जाएगी, कछुए की चाल की तरह बुढापे में चलती नजर आएगी। जवानी यू ही निकल जाएगी, कछुए की चाल की तरह बुढापे में चलती नजर आएगी।
जाती माँ संग चार घरों में धोने बर्तन, कोई दुत्कारता तो कोई दे देता चन्द टुकड़े रोटी के। जाती माँ संग चार घरों में धोने बर्तन, कोई दुत्कारता तो कोई दे देता चन्द टुकड़...
रखी थी तस्वीर माँ की मेज़ पर, आया एक वृद्ध देख तस्वीर चौक गया, रखी थी तस्वीर माँ की मेज़ पर, आया एक वृद्ध देख तस्वीर चौक गया,
मोह माया छोड़ मानव, जोड़ मन भगवान से । मोक्ष की हो कामना बस, कर्म कर हर ध्यान से । मोह माया छोड़ मानव, जोड़ मन भगवान से । मोक्ष की हो कामना बस, कर्म कर हर ध्यान...
आया कार्तिक पावन मास, लाया त्योहारों का मेला। आया कार्तिक पावन मास, लाया त्योहारों का मेला।
हर तरफ आपस में सबका, बस केवल ही प्यार हो। हर तरफ आपस में सबका, बस केवल ही प्यार हो।
जन्मदिन तो अधिकार है, मध्यम और उच्च वर्ग का। जन्मदिन तो अधिकार है, मध्यम और उच्च वर्ग का।
ऐ ज़िन्दगी कहते हैं, बड़ी ही अजीब तेरी दास्तान है। ऐ ज़िन्दगी कहते हैं, बड़ी ही अजीब तेरी दास्तान है।
खुशबू से घर को महकने दो, बेटी है, बेटी रहने दो। खुशबू से घर को महकने दो, बेटी है, बेटी रहने दो।
भीड़ के टुकड़ों में बँट गया शहर मेरा... भीड़ के टुकड़ों में बँट गया शहर मेरा...
एक परी मिली थी सपनों के शहर से, कुछ सहमी सी लगी मुझे अपनो के कहर से। एक परी मिली थी सपनों के शहर से, कुछ सहमी सी लगी मुझे अपनो के कहर से।
लोकतंत्र हमको मिला है, जैसे कोई हो इक वरदान। इसमें तो शामिल है कितने, वीर शहीदों का लोकतंत्र हमको मिला है, जैसे कोई हो इक वरदान। इसमें तो शामिल है कितने, व...
जिसने है दिया वजूद तुझे.. तेरे होने का सबूत तुझे। जिसने है दिया वजूद तुझे.. तेरे होने का सबूत तुझे।
स्वतंत्र भारत की तुमको मैं, तस्वीर दिखाने आया हूँ। स्वतंत्र भारत की तुमको मैं, तस्वीर दिखाने आया हूँ।
जीवन का ये सत्य शाश्वत आज तुम्हें समझाता हूँ। जीवन का ये सत्य शाश्वत आज तुम्हें समझाता हूँ।
जो कुछ भी है जीवन तक है, जीवन रहते ही सब संवार लीजिए। जो कुछ भी है जीवन तक है, जीवन रहते ही सब संवार लीजिए।
जीवन की बगिया में, सुख के फूल खिलाता, तूफ़ान दुखों का कभी जीवन में लेकर आता, जीवन की बगिया में, सुख के फूल खिलाता, तूफ़ान दुखों का कभी जीवन में लेकर आता,
परिचित सा शब्द 'डर' क्यों, कहाँ, कब, किससे? परिचित सा शब्द 'डर' क्यों, कहाँ, कब, किससे?