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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Inspirational

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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Inspirational

मातृभूमि- वंदना

मातृभूमि- वंदना

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भारत हमारी माँ है, माता का रूप प्यारा।

 करना इसी की रक्षा, कर्त्तव्य है हमारा।।


हिंदू हो या कि मुस्लिम, सिख हो या हो ईसाई।

 मां भारती के बेटे, आपस में भाई -भाई।

 सदा एक हम रहेंगे, संकल्प- दृढ़ हमारा।

भारत हमारी मां है, माता का रूप प्यारा।

करना इसी की रक्षा, कर्त्तव्य है हमारा।।


इसी गोद में हैं जन्मे, पलकर बड़े हुए हैं ।

वे भी थे हमारे जैसे, जो शहीद हो गए हैं ।

अपना सभी कुछ हमने,सेवा में इसकी बारा ।

भारत हमारी मां है, माता का रूप प्यारा।

करना इसी की रक्षा , कर्त्तव्य है हमारा।।


इसके लिए जीयेंगे, इसके लिए मरेंगे ।

करने को इसकी रक्षा, तत्पर सदा रहेंगे ।

हो शहीद इसके हित हम, सौभाग्य हो हमारा। 

भारत हमारी मां है, माता का रूप प्यारा।

करना इसी की रक्षा, कर्त्तव्य है हमारा।।


मिलजुल के हम रहेंगे, बेहतर मिसाल बन कर।

रिपु कर सके कभी न, चक्षु- प्रहार इस पर।

भयभीत रहे दुश्मन, देख ऐक्य बल हमारा।

भारत हमारी मां है, माता का रूप प्यारा।

करना इसी  की रक्षा, कर्त्तव्य है  हमारा।।


इस को विकास की अब, ले बुलंदियों पे जाना ।

आगे है यूं बढ़ाना, पीछे हो सब जमाना ।

खोया हुआ  वह गौरव, लाएंगे हम दोबारा ।

भारत हमारी मां है, माता का रूप प्यारा ।

करना  इसी  की रक्षा, कर्त्तव्य है हमारा।।


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