STORYMIRROR

Asif Darediya

Romance

0  

Asif Darediya

Romance

माशूक से मिलन..

माशूक से मिलन..

1 min
598


कासिद", लम्हें माशूक से मिलन के यूँ सिमट गये..

जैसे पन्ने तुम किताब के यूँ ही पलट गये....


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance