Hemant Kumar Saxena
Abstract
आया हूँ भूला शाम को
लौट घर मेरे यारों,
माफ कर दीजिएगा
कटु वचन बोलूँ नहीं मैं,
माफ कर गुस्ताखियाँ
इंसाफ कर दीजिएगा,
गर गुस्ताखी कोई
हुई हो मुझसे,
हर गुनाह से माफ कर
देना मुझको,
कर इंसाफ मेरा,
हर बात सुन लेना मेरी।
वक्त गुजर गया...
पापा के बिन
सोचो और समझो
अंज़ाम ए मुहब...
मां भारती तेर...
खबरदार जीजाजी
आकाश तेरा छोर...
सच्चाई
चलो आज दिल ये...
हां मुझे प्या...
अपनी मिट्टी-अन्न-धूप-रुत-समीर न देंगे कीमत कोई भी हो पर कश्मीर न देंगे। अपनी मिट्टी-अन्न-धूप-रुत-समीर न देंगे कीमत कोई भी हो पर कश्मीर न देंगे।
अपनी पृथ्वी माँ को दिलों जान से। अपनी पृथ्वी माँ को दिलों जान से।
गलियों में जो खुशहाली थी, अब देखे से नहीं दिखती है। गलियों में जो खुशहाली थी, अब देखे से नहीं दिखती है।
अगर आए मुझे पर उलझन खुद आँख भर लेती है कैसे लिख दूँ माँ तू कितनी अच्छी है। अगर आए मुझे पर उलझन खुद आँख भर लेती है कैसे लिख दूँ माँ तू कितनी अच्छी है।
यह उपकरण श्रेष्ठ लेकिन मानव के चलाए ही चलता।। यह उपकरण श्रेष्ठ लेकिन मानव के चलाए ही चलता।।
हंसी खुशी से मिलकर आओ, निज कर्तव्य निभाए।। हंसी खुशी से मिलकर आओ, निज कर्तव्य निभाए।।
आदिम सोच सी इस ज़ंजीर की कड़ियों को तोड़ते लोहू लुहान हाथों को देखा है ! आदिम सोच सी इस ज़ंजीर की कड़ियों को तोड़ते लोहू लुहान हाथों को देखा है ...
अफ़वाहों सी चलें हवाएँ कभी तो छू करके महकाये.. अफ़वाहों सी चलें हवाएँ कभी तो छू करके महकाये..
मेरी ये कविता उस सच्चे दोस्त नाम है जो दोस्ती को दे देता अलग ही पहचान है। मेरी ये कविता उस सच्चे दोस्त नाम है जो दोस्ती को दे देता अलग ही पहचान है।
कैसे लिख दूँ माँ तू कितने अच्छी है। कैसे लिख दूँ माँ तू कितने अच्छी है।
और दुनिया के इस इम्तेहान में जीत कर रहेंगे। और दुनिया के इस इम्तेहान में जीत कर रहेंगे।
बदल गया है जहां मेरा दुनिया बदल सी गईं हैं। बदल गया है जहां मेरा दुनिया बदल सी गईं हैं।
कुछ तो ज्यादा लिख नहीं सका इसलिए मेरा पूरा ज़िंदगी ही तेरे नाम कर दिया। कुछ तो ज्यादा लिख नहीं सका इसलिए मेरा पूरा ज़िंदगी ही तेरे नाम कर दिया।
ये कैसी आजादी मिली है हमें जहाँ समझौते की बात आई है। ये कैसी आजादी मिली है हमें जहाँ समझौते की बात आई है।
बधाई हो बधाई तुझे जन्मदिन की बधाई ओ! मेरी प्यारी बहना। बधाई हो बधाई तुझे जन्मदिन की बधाई ओ! मेरी प्यारी बहना।
और जब तुम्हें जरूरत पड़ेगी तो कहेंगे "बेटा कल आना।" और जब तुम्हें जरूरत पड़ेगी तो कहेंगे "बेटा कल आना।"
शिक्षा का दीप्त रोशनी देखिए मानव को कहां पहुंचा रहा है जंगल के स्थान पर फैक्टरी और शिक्षा का दीप्त रोशनी देखिए मानव को कहां पहुंचा रहा है जंगल के स्थान पर ...
हिज़्र में निगाहे यार जो दो-चार हो जाती, तो गुमान-ए-वस्ल की फ़िर रात कहाँ आती।। हिज़्र में निगाहे यार जो दो-चार हो जाती, तो गुमान-ए-वस्ल की फ़िर रात कहाँ आती।।
मां शब्द नहीं है मेरे पास तेरे गुणगान के लिए मां तुम हो अनमोल ममता भरा दिल लाई हो। मां शब्द नहीं है मेरे पास तेरे गुणगान के लिए मां तुम हो अनमोल ममता भरा दिल ल...
देख रहे है शान से, कुदरत की मनमानी। देख रहे है शान से, कुदरत की मनमानी।