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Hemant Kumar Saxena

Abstract

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Hemant Kumar Saxena

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माफ कर देना मुझे

माफ कर देना मुझे

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आया हूँ भूला शाम को

लौट घर मेरे यारों,


माफ कर दीजिएगा

कटु वचन बोलूँ नहीं मैं,


माफ कर गुस्ताखियाँ

इंसाफ कर दीजिएगा,


गर गुस्ताखी कोई

हुई हो मुझसे,


हर गुनाह से माफ कर

देना मुझको,


कर इंसाफ मेरा,

हर बात सुन लेना मेरी।



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