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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract

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Dhan Pati Singh Kushwaha

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मानो या न मानो

मानो या न मानो

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अपने जीवन में लेने होते हैं हमें सदा निर्णय,

दिल और दिमाग हैं इनके तो पैमाने।

ये तो हालात और विकल्पों पर है आश्रित, 

इनमें पैमाना कौन सा हम कब मानें ?


करना चाहिए दिमाग प्रयोग हमें,

खुद नया सीखने और कुछ को नया सिखाने में।

पवित्रता और सरलता वाला दिल चाहिए बच्चे सा,

अपने रिश्तों को सदा निभाने में।


कोई तिकड़म तो भूलकर न तुम करना,

करो अर्जित वह शक्ति और तिकड़म पहचानो।

पैदा करो विवेक नीर और क्षीर का हंस के सम ही,

फिर दिए सुझाव को तुम मानो या नहीं मानो।


होते हैं जब भी कभी हम दुविधा में,

तो हम सबको चाहिए एक सलाह होती है।

रास्ते में मिलते हैं हमें जो चौराहे,

वहाॅ॑ पर हमको चुननी मंजिल की राह होती है।


रास्ते तो हैं अनेक मंजिल पर जाने के,

क्षमता और साधन सबके ज़ुदा और अपने हैं।

सबकी ज़ुदा-जुदा हसरत - कुब्बत है,

और सबने अलग ही अलग बुने अपने सपने हैं।


पानी गर है हमें अपनी मंजिल,

तो कड़ी मेहनत का कोई भी विकल्प ना है जानो।

होकर के प्रेरित और सच्ची लगन से,

चूमेगी चरण सफलता तुम्हारे ये निश्चित मानो।


देखो हालात जमाने के और अपने ही,

तय करो मंजिल उनमें से जो भी सपने हैं।

पूर्ण अपनत्व भाव लेकर मिलो सबसे,

भाव हम सबके और सभी तो अपने हैं।


एक हालात नहीं रहते हैं कभी हैं जग में,

स्वाद कटु और मृदु तो हमें ही चखने हैं।

दोस्त तो हो नहीं सकती है ये सारी दुनिया,

मित्र संग शत्रु भी हमीं को रखने हैं।


परख भी मुश्किल हो जाती है बड़ी जग में,

सजग रह शत्रु-मित्र को पहचानो।

मिल तो सकते हैं सुझाव ढेरों भी,

अब ये तुम पर है उनको मानो या नहीं मानो।


बहुतायत में मिलते हैं जग में बताने वाले,

पर समझने वाले बड़ी मुश्किल से यहॉ॑ मिलते हैं।

समझना तो बमुश्किल ही है भाता कुछ को,

पर समझाते हुए हम सबके ही चेहरे खिलते हैं।


बस इक सलाह ही तो मुफ्त है इस दुनिया में,

चाहिए एक सुझाव ही है पर ये तो हजार मिलते हैं।

सलाह बेशक कहीं-किसी से भी ले लें,

मगर फैसला तुम्हें है क्या लेना ? यह तुम ही जानो।


कस लो इन सुझावों को तर्क की कसौटी पर,

और क्या होगा उचित निर्णय यह पहचानो।

हर सलाहकार भी कहता सलाह देकर ये,

है ये सलाह मेरी अब ये तुम पे है मानो या न मानो।


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