STORYMIRROR

Archana Saxena

Inspirational

4  

Archana Saxena

Inspirational

माँ

माँ

1 min
248

माँ से बढ़ कर जग में कोई

 और नहीं होता वरदान

अपने बच्चों के लिये इक

 माँ खो देती अपनी पहचान


प्रभु ने जब भेजा धरती पर

 मिला आसरा माँ की कोख में

नौ महीने तक गर्भ में रख कर

तुझे ले आई इस दुनिया में

तेरी भोली अदाओं पे रीझे

तुझ पर होती वह कुर्बान

 

तुझको बाँहों में भर कर वह

अपने भाग्य पर है इतराती 

कहती तुझे अनमोल रतन धन

तेरी बलायें लेती जाती

तेरी एक हँसी पर वारी

उसने अपनी सौ मुस्कान


दिल की कितनी कोमल है माँ

तेरे आँसू पर रो देती

पर यदि तुझ पर संकट आये 

चंडी का वह रूप धर लेती

तेरी रक्षा करने की खातिर

हँस कर दे देती वह जान


ईश्वर साथ नहीं चल सकते

जीवन पथ की इस यात्रा में

इसीलिए मिलवाया माँ से

दिया सुरक्षित उन हाथों में

सौंपा उनकी गोद में कह कर

अब से यह तेरी सन्तान


माँ ने भी फैला कर बाँहें

गोद में अपनी तुझे छुपाया

तेरी खातिर खुद को भूली

तेरे लिये कर्त्तव्य निभाया

उसकी तो हर साँस में तू ही

तुझ पर न्योछावर उसके प्राण


बूढ़ी हो चली उसकी काया

हाथ पाँव सब दुखने लगे हैं

शायद अब वह नहीं है कहती

प्राण पर अब भी तुझमें बसे हैं

उसके बुढ़ापे की लाठी बन 

तुझे ही रखना है अब ध्यान


माँ का कर्ज चुकाना मुश्किल

इतना कभी न कर पाओगे

इतनी निश्छल ममता उसकी

कैसे उसे लौटा पाओगे

पर इतना ही कर देना बस

कभी नहीं करना अपमान।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational