माँ
माँ
माँ से बढ़ कर जग में कोई
और नहीं होता वरदान
अपने बच्चों के लिये इक
माँ खो देती अपनी पहचान
प्रभु ने जब भेजा धरती पर
मिला आसरा माँ की कोख में
नौ महीने तक गर्भ में रख कर
तुझे ले आई इस दुनिया में
तेरी भोली अदाओं पे रीझे
तुझ पर होती वह कुर्बान
तुझको बाँहों में भर कर वह
अपने भाग्य पर है इतराती
कहती तुझे अनमोल रतन धन
तेरी बलायें लेती जाती
तेरी एक हँसी पर वारी
उसने अपनी सौ मुस्कान
दिल की कितनी कोमल है माँ
तेरे आँसू पर रो देती
पर यदि तुझ पर संकट आये
चंडी का वह रूप धर लेती
तेरी रक्षा करने की खातिर
हँस कर दे देती वह जान
ईश्वर साथ नहीं चल सकते
जीवन पथ की इस यात्रा में
इसीलिए मिलवाया माँ से
दिया सुरक्षित उन हाथों में
सौंपा उनकी गोद में कह कर
अब से यह तेरी सन्तान
माँ ने भी फैला कर बाँहें
गोद में अपनी तुझे छुपाया
तेरी खातिर खुद को भूली
तेरे लिये कर्त्तव्य निभाया
उसकी तो हर साँस में तू ही
तुझ पर न्योछावर उसके प्राण
बूढ़ी हो चली उसकी काया
हाथ पाँव सब दुखने लगे हैं
शायद अब वह नहीं है कहती
प्राण पर अब भी तुझमें बसे हैं
उसके बुढ़ापे की लाठी बन
तुझे ही रखना है अब ध्यान
माँ का कर्ज चुकाना मुश्किल
इतना कभी न कर पाओगे
इतनी निश्छल ममता उसकी
कैसे उसे लौटा पाओगे
पर इतना ही कर देना बस
कभी नहीं करना अपमान।
