माँ
माँ
माँ की छाया में
पाया मैंने उसका असीम स्नेह का सरमाया
ना कोई द्वेष का द्वार
ना कभी कोई अहंकार
ममतामयी स्पर्श के पंख पर सवार
मैंने कदम रखे घर के दहलीज के उस पार
अब कुछ आसान नहीं है
माँ के स्पर्श का कोमल एहसास नहीं है
दिल भरा हो तो माँ किधर है
ममतातायी गोद पर सर रखने को मेरा दिल तड़प उठा है
कल माँ की चिट्ठी आई
न जाने कैसे भाप लेती है मेरे दिल की कैफ़ियत को
लिखती मुझे चिट्टी में;
मेरी नन्ही परी
क्यूँ उदास है तू
ज़रा अपने आंसू की नमी को पोंछ ले तू
अपने दिल की दस्तक को सुन ले तू
क्या तुझे अपनी धड़कन सुनायी दी
उसमें मैंने अपनी ममता बसाई है
जरा ध्यान से सुन
मेरी नन्ही गुड़िया
मेरे आँगन की चिड़िया
मैंने तेरा आकार बड़े हौसलों से सींचा है
तेरे अक्स की सुंदरता को मैंने देखा है
अब तोड़ दे निराशाओं की कच्ची डोरी को
और पंख फैला कर आसमान की ऊंची उड़ान भर ले तू।
