माँ से प्रार्थना ।
माँ से प्रार्थना ।
आया हूं तेरे दर पे कुछ लेके जाऊँगा ।
यदि नहीं मिल सकेगा कुछ भी,
सिर चढ़ा कर जाऊँगा ।।
गर तुझको सिर भी न हो मंजूर,
तो होगा बड़ा ही पाप ।
चूंकि माँ अब तो मान ही लिया है
तुमको अपना माई-बाप ।।
माँ तूने ही रचा है ,
इस संसार का गुलदस्ता ।
मुरझाये हुए फूलों को,
तूने बना दिया है खिलता ।।
यह संसार भी तेरा है,
रहमतों का है खजाना ।
क्या करूँ,कैसे माँगूं ,
फिरता हूँ बना दिवाना ।।
मेरा सिर्फ गुनाह है इतना,
कि मैं तेरा सेवक नहीं।
लेकिन माँ तू ये न समझना कि
मैं तेरा पुत्र नहीं।।
इस संसार में तेरे ही रचित,
कितने फिरते हैवान यहाँ ।
विनती मेरी बस हे! मात है
इतनी बना दे उनको इन्सान यहाँ ।।
सवाल माँ तुमसे है इतना,
है क्यों बनाया इस प्राणी को ?
क्या जानवर कम थे जग में,
इस संसार में चरने को ?
अब माँ तुझे बिगड़ी बनानी ही पड़ेगी ,
इसका कोई मोल नहीं ।
नादान हूँ ,नासमझ हूँ इतना,
क्या दर पे मिलेगा इंसाफ नहीं ।।
माँ मैं निष्ठुर सही,
पर तेरे दर से हट कर न जाऊँगा।
पड़ा रहूंगा तेरी चौखट पर
कभी तो रिझा पाऊँगा ।।
यह कटु सत्य है कि मैं बेटा हूं,
तू मात है मेरी।
करूण हृदय को विश्वास है तुझ पर,
चाहे हो जाये कितनी भी देरी।
माँ तेरा जो वरद है मुझपर ,
तुम उसे अवश्य पूरा करोगी।
कपूत सही, पर विश्वास है मुझ को
निराश न तुम मुझ को करोगी।।
सिर चढ़ाने का जो वादा किया,
माँ तुमको है उसकी याद ।
क्यों कि मैं तो वो परवाना हूँ,
जो शम्मा पे हो जाये बर्बाद।।
अंतिम प्रार्थना है आपसे
हे!माँ इस " नीरज" की।
तेरे चरणों में ही गुजारा हो,
नहीं परवाह संसार की ।।
