STORYMIRROR

Jyoti Deshmukh

Inspirational

4  

Jyoti Deshmukh

Inspirational

माँ पिता को भूलना नहीं

माँ पिता को भूलना नहीं

1 min
246

भूलो सभी को मगर माँ पिता को भूलना नहीं

उपकार अनेक है उनके इस बात को भूलना नहीं 


पत्थर पूजे कई तुम्हारे जन्म के खातिर अरे 

पत्थर बन माँ पिता का दिल कभी कुचल ना नहीं 


मुंह का निवाला दे जिन्होंने तुम्हें बड़ा किया 

अमृत पिलाया तुमको, जहर उनके लिए उगलना नहीं 


कितना प्यार दिया सब अरमान पूरे किए 

पूरा करो अरमान उनके, यह बात भूलना नहीं 


लाख कमाते हो भला माँ पिता से ज्यादा नहीं 

सेवा बिना सब राख है, मद में कभी फूल ना नहीं 


जो संतान से सेवा चाहो, संतान बन सेवा करो 

जैसी करनी वैसी भरनी, यह नीति भूलना नहीं


सोकर स्वयं गिले में सुलाया तुम्हें सूखे में 

माँ की ममतामयी आँखों को भूल कर भिगोना नहीं 


जिसने बिछाये फूल थे हर पल तुम्हारी राहों में 

उस रहबर की राहों के काँटे कभी बनना नहीं 


धन तो मिल जाएगा मगर माँ पिता क्या मिल पाये 

पल पल पावन उन चरणों की, चाह कभी भूलना नहीं 

     



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational