माँ की मुस्कान
माँ की मुस्कान
मेरी गरीबी मजबूरी और लाचारी
सब पर माँ की मुस्कान है भारी
संसाधनो के अभाव में सर्द रात में
बिना कंबल ठंडी जमीं टूटे मकान में।
रात गुजर जाती है यूँ ही हँसते हँसते
माँ के आँचल मे सर रख अलाव ताकते
छोटी सी दुनिया और मेरा आशियाना
मेरी माँ की ममता है मेरा खजाना।
गर्मी सर्दी और बरसात दे के जाती है
नए अनुभव मुझको हर साल
माँ मजदूरी कर मुझको पालती है
मुझे पढ़ाने खातिर अपने उपर
काम का अतिरिक्त बोझ डालती है।
वक्त ने मुझे सबल बनाया है माँ ने
हर परिस्थिति मे मुस्कुराना सिखाया है
यूँ तो यह समय भी बीत जाएगा
इन हालातों से मेरा दामन छूट जाएगा।
लेकिन माँ के साथ बिताये इन लम्हों
का काँरवा फिर लौट के कहां आएगा
तेरे त्याग बलिदान ममता करुणा का
जीवन की अंतिम श्वास तक ऋणी रहूँगा
हर सांस मे माँ तेरा नाम जपूँगा........।
