मां और नवजात बच्चे का पहली नजर का प्यार
मां और नवजात बच्चे का पहली नजर का प्यार
पहली नज़र का प्यार
पहली नज़र के प्यार की क्या बात करें!
जब एक माँ अपने बच्चे को जन्म देती है, उसी क्षण जब पहली बार माँ की नज़र अपने बच्चे से मिलती है और बच्चे की आँखें माँ को पहचानती हैं, तब दोनों के बीच प्रेम का एक ऐसा अटूट बंधन बन जाता है, जिसे शब्दों की जरूरत ही नहीं होती।
न बोल पाने वाला वह नन्हा-सा बच्चा भी माँ की आवाज़ पहचानता है, उसकी गोद में सुकून पाता है और उसकी आँखों में अपना पूरा संसार देख लेता है।
और माँ की तो बात ही निराली है—उसे लगता है जैसे उसे जिंदगी का सबसे अनमोल तोहफा मिल गया हो।
यह कैसा प्रेम है, जिसमें कोई वादा नहीं, कोई शर्त नहीं, कोई अपेक्षा नहीं…
सिर्फ आँखों से आँखों का मिलना और दिल से दिल का जुड़ जाना है।
यही तो है पहली नज़र का सच्चा प्यार, जो समय के साथ कम नहीं होता, बल्कि बच्चे के साथ-साथ बढ़ता जाता है और जीवन की आखिरी साँस तक बना रहता है।
शायद इसलिए माँ और बच्चे का रिश्ता दुनिया का सबसे खूबसूरत रिश्ता है—
जिसकी शुरुआत पहली नज़र से होती है और जिसका अंत कभी नहीं होता।
स्वरचित कविता
विमला जैन
