माँ आखिर माँ होती है
माँ आखिर माँ होती है
नौ मास पेट में पालती है
संभालती है, कष्ट उठाती है
जनम देने के बाद पिता का नाम
देती है।
माँ आखिर माँ होती है।
चलना सिखाती है
खाना खिलाती है
बडे होने के बाद चिल्लाती डाटती है।
माँ आखिर माँ होती है।
अपने बारे में सपने होते हैं उसके
नाम कमाने के संस्कार है उसके।
पिता के डांट से हमे बचाती है
माँ आखिर माँ होती है।
इसलिए अपने माँ का सबजन रखो खयाल।
माँ रहेगी खुश तो हो जाओगे
मालामाल।
