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Rishabh Tomar

Abstract

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Rishabh Tomar

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लक्ष्मीबाई बन जाओ

लक्ष्मीबाई बन जाओ

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मौन रही तो इंद्र रोज ही शील लूटने आयेगा

दरबारों का हर दुःशाशन चीर खींचने आयेगा

उठो,हाथ तलवार उठालो लक्ष्मीबाई बन जाओ 

तो पीछे से युद्ध तुम्हारा ये जग लड़ने आयेगा


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