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सोनी गुप्ता

Abstract

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सोनी गुप्ता

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लेखक की लेखनी

लेखक की लेखनी

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संकट आया जब जीवन में

कितनी अशांति फैली मन में I

लेखक की चल गई लेखनी

ताकि ग्रहण न लगे खालीपन में

कोरोना का विष ऐसा फैला है

जीवन को मौत की ओर ढकेला है।


अपने घर पर रहो सुरक्षित तुम

अपने साथ सबकी सुरक्षा विचारो तुम I

कोरोना को मिलकर सभी को हराना है

इस मुश्किल घड़ी में न हारो तुम।

लेखक की चल गई लेखनी

ताकि ग्रहण न लगे खालीपन में।


घर रहकर देश के साथ चलना सीखो

हर परिस्थितियों में बदलना सीखो

चाँद तारे छू सकते हो तुम

हर मौसम में ढलना सीखो तुम।

लेखक की चल गई लेखनी

ताकि ग्रहण न लगे खालीपन में।


कुछ लोग घूमते बाहर हमेशा

जानना है बाहर क्या होता है ?

क्यों तुम बाहर जाते हो

टी.वी.देख घर बैठे ही जानो तुम।

लेखक की चल गई लेखनी

ताकि ग्रहण न लगे खालीपन में।


सोच सही मार्ग सही अपनाओ

प्रतिपल मनमीत सुधारो तुम

निष्ठा पथ निहारो तुम

अनुचित सोचो न विचारो तुम।

लेखक की चल गई लेखनी

ताकि ग्रहण न लगे खालीपन में।


सबको खुश रहने का आह्वान

हम सबको करना है

इस कोरोना वाइरस को

मिलकर हमें हराना है।

लेखक की चल गई लेखनी

ताकि ग्रहण न लगे खालीपन में।


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