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लेखक का दिल

लेखक का दिल

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लेखक का दिल बसता है

उसकी कलम में ,

आशिक का दिल बसता है

उसके सनम में 

कलम लेखक की

आत्मा कहलाती है,

प्यार में दो आशिकों की

आत्मा एक हो जाती है,


लेखक अपनी भावनाओं को

कलम की स्याही से दर्शाता है,

आशिक अपना हर दुःख अपने

प्यार से ही साँझा कर पाता है,


कागज़ देख लेखक का मन

लिखने को मचल जाता है,

महबूब का चेहरा देख आशिक

अपना हर दुःख भूल जाता है


कलम और लेखक का रिश्ता है

अनोखा और पुराना,

जिसको मुश्किल है प्यार

जैसे तराजू में तोल पाना ,

कलम बिन लेखक, लेखक बिन

कलम कैसा होगा यह अफसाना,

दो आशिकों को अलग कर तुम

कभी पाप मत कमाना ॥


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