STORYMIRROR

upma Bhatt

Inspirational

3  

upma Bhatt

Inspirational

लाजवाब

लाजवाब

1 min
181

मुझे बयान करे ऐसी कोई किताब नहीं 

मेरी हकीकतों के जैसा तो कोई ख्वाब नहीं।

सुनो! तुम पूछते थे ना कि मैं क्या हूँ ?

मैं लाजवाब हूँ, मेरा कोई जवाब नहीं।

ना पूछ तुझसे मेरी नफ़रतों की हदें 

बेहद हैं, खुब हैं, इनका कोई हिसाब नहीं।

क़हर बहुत हैं दुनिया में देखने को मगर

मेरे अताब से बढ़कर कोई अज़ाब नहीं ।

जो तुम दीवार हो तो आफताब है 'उल्का'

उसे छुपा सके, ऐसा कोई हिज़ाब नहीं।


अताब- गुस्सा, अजाब-आफत, पीड़ा 

आफताब- सुर्य , हिजाब- ओट, पर्दा 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational