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Madhu Vashishta

Inspirational

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Madhu Vashishta

Inspirational

क्यों लेते हो परीक्षा?

क्यों लेते हो परीक्षा?

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नमन तुम्हें हे कृष्ण मुरारी 

क्यों लेते हो परीक्षा हमारी। 

हम कैसे परीक्षा दे पाएंगे 

प्रभु टूट के क्या बिखर न जाएंगे? 

क्रोध मोह रिपु पीछे पड़े हैं 

माया, तृष्णा है प्रलंयकारी।

ईर्ष्या द्वेष ने चैन मेरा छीना।

पार पाऊं कैसे कृष्ण मुरारी?

प्रभु तुम अभी कोई परीक्षा ना लेना। 

मूढ़ मति मैं बस इतना है कहना। 

प्रभु अपने चरणों का दास तुम बनालो।

माया मोह से मुझे बचा लो। 

प्रभु मेरी जिम्मेदारी तुम ही संभाल लेना। 

कोई भी परीक्षा आए तो थाम लेना। 

प्रभु भवसागर से पार कर दो

अपने नाम की नौका में मुझको बिठा लो ।

दुख सुख कुछ भी आए मन मेरा डिगे ना।

तेरे दरस के सिवा और कुछ दिखे ना।

दुनिया में रहकर भी मन दुनिया में रमे ना।

तुम में समाए ऐसे कि तुम बिन कुछ भी दिखे ना।

जय जय जय जय जय कृष्ण मुरारी। 

हम भी तुम्हारे और परीक्षा भी तुम्हारी। 



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