क्यों कहे सब परायी मुझे
क्यों कहे सब परायी मुझे
ओ बाबुला तेरा ही अंश हूँ मैं तेरी ही परी हूँ मैं
तेरी ही गोद में झूला झूली हूँ मैं
तेरा ही खून रग रग में है मेरे
हर पल हँसना सिखाया है तूने मुझे
मेंरी हर ज़िद्द को पूरा किया है तूने
उँगली पकड़ कर चलना सिखाया तूने मुझे
तेरे ही आँगन की रौनक हूँ मैं
फिर क्यों सब कहते है मुझसे कि मैं तो परायी हूँ ।।।
ऐ माँ दिया है जनम तूने मुझे
तेरा ही दूध खून बनकर रगों में ं में री दौड़ रहा
तेरी ही परछाई हूँ मैं तुझसी ही दिखती हूँ मैं
तेरे सिखाये सबक पर चल रही हूँ
हर मां मर्यादा का है ख्याल मुझे
माना कि थोड़ी सी चंचल हूँ मैं
समय के साथ बदल रही हूँ मैं
घर में बैठकर नही घर से बाहर निकल कर
दुनिया का सामना कर रही हूँ
हर किसी के साथ कदम से कदम मिला कर चल रही हूँ
फिर भी सब ये ही कहते है चार लोग क्या कहेंगे
समझदार हो जाओ थोड़ी सी क्योंकि तुम तो परायी हो ।।।
जिस घर में मेंरा जन्म हुआ
जिस घर के आँगन में मैं खेली खुदी
जिस घर में मैंने झूला झूला
जिस घर से है में री यादें जुड़ी
जिस घर में मेंरे सपने परवान हुए
जिस घर में है में री आत्मा बस्ती
वो घर वो आँगन क्यों हो जाएगा पराया
बस ये ही सोच सोच मन उदास हो जाता है कि
मेंरे अपने ही मुझे क्यों बेगाना करने पर तुले हुए ।।।
