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SUMAN ARPAN

Abstract

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SUMAN ARPAN

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क्या नाम दूँ

क्या नाम दूँ

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ख़ुदा मेरे मैं तुम को क्या नाम दूँ?ज़िन्दगी को अपनी क्या अंजाम दूँ!

मोहब्बत है इबादत और इश्क़ है सजदा,

प्यार को पूजूँ या आरती का नाम दूँ!

ख़ुदा मेरे 

सौंप दी ज़िन्दगी की डोर तेरे हाथों में,

धड़कनों को अपनी क्या आयाम दूँ!

जिधर देखतीं हूँ उधर तुम ही तुम हो,

आईने को अपने क्या नाम दूँ!

ख़ुदा मेरे.....

हर तरफ़ तेरा ही तसब्बुर है, 

परछाइयों को अपनी किसका नाम दूँ!

सूरज कहूँ या तुमको पुकारूँ चंदा 

तारों ने सजाई है जो बेला,

उस बेला को क्या नाम दूँ!

ख़ुदा मेरे.....

धरती कहूँ या तुमको बुलाऊ अम्बर,

क्षितिज पे दोनों के मिलन को क्या अंजाम दूँ 

ख़ुदा मेरे....

लम्हे लम्हे पर लिखा है नाम तुम्हारा,

ज़र्रे ज़र्रे में है ज़िक्र तुम्हारा 

हर धड़कन लेतीं हैं नाम तुम्हारा,

दिल से आती है जो सदा,

उस सदा को क्या पैग़ाम दूँ!

ख़ुदा मेरे तुम को मैं क्या नाम दूँ?



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