क्या क्या नहीं सिखाया
क्या क्या नहीं सिखाया
वाह री किताब,
तू है महान।
क्या-क्या करूँ तेरा,
मैं गुणगान।
क्या नहीं सिखाया,
तूने मुझको।
क्या नहीं दिखाया ,
तूने मुझको।
बचपन से दिया साथ,
तूने मुझको।
अभी तक थामे रखा है,
तूने मुझको।
विज्ञान, गणित व समाजशास्त्र का,
ज्ञान दिया तूने मुझको।
अपनी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति व कला का,
भान कराया तूने मुझको।
अपनी भाषा और राष्ट्रीय भाषा से,
परिचित कराया तूने मुझको।
अन्य भाषाओं का भी,
बोध कराया तूने मुझको।
राजनीति तथा देश विदेश की खबरों की,
जानकार बनाया तूने मुझको।
कितनी नामी हस्तियों की,
जानकार बनाया तूने मुझको।
कितने ही कवियों और लेखकों के जीवन से,
परिचित कराया तूने मुझको।
कितने महापुरुषों, देशप्रेमियों व वीर शहीदों की गाथाओं से,
परिचित कराया तूने मुझको।
कितने किस्से, कहानियाँ व चुटकुले सुनाकर,
खूब हँसाया तूने मुझको।
कितने तरीकों को अपनाकर,
समझदार बनाया तूने मुझको।
माँ सरस्वती का दर्शन कराया ,
तूने ही मुझको।
देशप्रेम, भाईचारे और एकता का,
पाठ पढ़ाया तूने मुझको।
अपने धर्म और ईमान को निभाना ,
सिखाया तूने ही मुझको।
कर्तव्यनिष्ठा और सत्यनिष्ठा का मार्ग,
दिखाया तूने ही मुझको।
जाति और धर्म का भेद भुलाकर,
साथ चलना सिखाया तूने मुझको।
वतन की राह में मिलकर ,
आगे बढ़ना सिखाया तूने मुझको।
कठिन परिस्थितियों से लड़ना,
सिखाया तूने मुझको।
सब्र और शांति को धरना,
सिखाया तूने मुझको।
स्टोरी मिरर तक पहुंचने के काबिल,
बनाया तूने मुझको।
"हिक कोशिश" किताब की कवयित्री,
और अनेकों प्रमाण पत्रों की हक़दार,
बनाया तूने ही मुझको।-2
