कविता no.2
कविता no.2
।। सदियों से चलती कहानी हमारी ।।
।। बीती है सदिया बीते हैं युग ।।
।। बीते न जाने साल कितने ।।
।। बदली है बस मेरी किया ।।
।। बदली ना सोच बदली ना माया।।
।। समय का चक्र बस चलता जाता ।।
।। इसे चाह कर भी कोई रोक ना पाता ।।
।। समय को हम काल कहते हैं ।।
।। जिसमें समाकर कोई लौट ना पाता ।।
।। इस जगत में है जीवन चारों ओर फैल।।
।। बस काल से कोई बच न पाता ।।
