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Sushma Tiwari

Abstract

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Sushma Tiwari

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कवच

कवच

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क्या दिख रही है वह औरत 

जो घुंघट में है

सुंदर शिल्प बना रही है

मिट्टी से सने हाथ

उसकी खामियां है या खूबसूरती


 उसका घूंघट तो देख सकते हैं

 जो उसके चेहरे को ढकता है

 या उसके दिल के राज छुपाता है

 कला की सुंदरता तो देखी पर


कला का अतीत कौन बताता है 

उसका घुंघट कवच है 

उसके अतीत पर एक कवच 

चोट और दर्द से बचाने के लिए

मन की सुन्दरता छुपा ली, है ना कमाल ?


वो श्रृंगार बिन किसे सुहाती

दिल की बातें कवच से छिपा

अब खूबसूरत शिल्प बनाती 

लेकिन ये जो कवच है


जिसे कभी यूँ ही नहीं दिखाती ? 

हाँ कला की तरह होगी उसकी सुंदरता 

जिन्हें वो दिखाना नहीं चाहतीं


अब उनके कवच में छिपे

बेरंग रंगों को देख सकते हैं 

या उनके सभी छिपे हुए इंद्रधनुषी सपनों को

यह अब भी एक कवच की तरह है ? 


कवच जो उन्हें बचा कर रखता है

लोगों के टिप्पणियों से 

कवच, जिसकी पुरुषों को

शायद नहीं आवश्यकता

एक पर्दा, जो छुपाता है कि

वे वास्तव में कौन हैं? 


लेकिन यह एक दीवार भी है

जो उन्हें बहुत दूर ले जा सकता है

रंगों से, सपनों से 

तो जब आप इस कवच को

अब जब देखते हैं,

तो आप देखते हैं

यह उनके रहस्यों का पर्दा है

या उनकी रंगीन सुंदरता है ?


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