कुंडलिया : भीमराव की म्हेर
कुंडलिया : भीमराव की म्हेर
सुविधा सारी ये करै, खुद सुविधा सै दूर।
बेगारी की मार ये, घणी सहै मजदूर।
घणी सहै मजदूर, बड़े किस्मत के मारे।
लगे रहै दिन रैन, काम ये करते सारे।
भीमराव की म्हेर, मेट दी इणकी दुविधा।
दिन म्ह घंटे आठ, काम की देकै सुविधा।
