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Anand Kumar

Abstract

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Anand Kumar

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कुछ वक़्त से

कुछ वक़्त से

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कुछ वक़्त से मैंने 

कुछ नया नहीं लिखा है,

ज़िन्दगी व्यस्त है बहुत

मन रहता परेशान है, 

और कलम मेरी शांत है ? 


किताबों से क्यूँ मेरा

बढ़ गया इतना फासला है ?

हर पल हूँ किसी महफ़िल में मैं

फिर भी, क्यों ये दिल अकेला है ?

वक़्त ने चलाया ये कैसा सिलसिला है ? 


जो कागज़ पुकारे मुझे, तो

कलम इंकार कर देती है,

कलम को मनाऊं कभी तो

समय बाधा बन आगे जाती है,

ये किसका किससे कैसा गिला है ? 


कुछ वक़्त से मैंने 

कुछ नया नहीं लिखा है।


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