STORYMIRROR

Shobhit Trivedi

Abstract

3  

Shobhit Trivedi

Abstract

कुछ तो अनोखा है तुझमें

कुछ तो अनोखा है तुझमें

1 min
356

तेरा यूं होठ मिला कर मुस्कुराना,

आंख झुका कर देख जाना,

दूर से मुझको छू जाना,

कुछ अनोखा है तुझमें।


तेरा चुप हो कर यूं बोल जाना,

शब्दों को शायर सा तोल जाना,

इश्क के लिबास में

यूं भगवान सा बोल जाना,

कुछ तो अनोखा है तुझमें।


तेरा आंखो में सब बोल जाना,

झूठ में सच को घोल जाना,

अपने ईश्वर (माता - पिता) के लिए,

सांसों सा रिश्ता तोड़ जाना।

कुछ नहीं, बहुत कुछ अनोखा है तुझमें।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract