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Vishnu Saboo

Abstract


4.3  

Vishnu Saboo

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कुछ काम आ गया

कुछ काम आ गया

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वो जिसने जाने के बाद

पलट के नहीं देखा मुझे

आज मुलाक़ात के लिए

वक़्त मांग रहा है

लगता है की जरूर

कुछ काम आ गया!


वो जिसे रोकने के लिए

हमने कितनी मिन्नते की

पर उस संगदिल ने

मेरी एक भी न सुनी

चला गया ठुकरा के

वो सारी मेरी मिन्नते

आज वो बहुत प्यार से

पेश आ रहा है

लगता है की जरूर

कुछ काम आ गया !


हम तड़पते रहे 

उसके एक पैगाम को

मेरे इंतज़ार से

वो बेखबर तो न था

फिर भी हर दफा

नज़रअंदाज करता रहा

आज वो हद से

ज्यादा मुसकरा रहा है

लगता है की जरूर

कुछ काम आ गया!



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