STORYMIRROR

MRIDULA SINHA

Abstract

4  

MRIDULA SINHA

Abstract

कुछ बातें

कुछ बातें

1 min
165

जो हम कहना चाहे और वो बस रह जाए दिल में ही

सच कहो तो वो बस कचोटती ही रहती है।


और बस एक हंसी का आवरण होता है खुद के ऊपर 

सच इतना बेगैरत सा क्यूं होता है


जिसे बोलने से ही हम डर जाते हैं

डर सच बोलने का नहीं होता 


डर उस इंसान के दूर हो जाने का होता है

जब एक झूठ से रिश्ता बच जाता है


तो हम बस रिश्ते की ही सोच जाते हैं

और एक एक कर सच छूटता जाता है 


झूठ की दीवार खड़ी होती जाती है

बस एक डर से खुद को बचाने को 


हम सब कुछ छोड़ जाते है

और घुट जाते हैं अंदर है अंदर


क्या रिश्ते को बचाने के लिए 

खुद की तिलांजलि देनी होती है


या खुद को ही खत्म करना होता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract