कुछ बातें खुद से.....।
कुछ बातें खुद से.....।
आज बहुत दिनों बाद दिल को अच्छा लगा,
जब खुद से कहीं सारी बातो को साझा किया,
अक्सर हम खुद की पहचान भूल जाते हैं,
और जमाना क्या सोचता है उसमें लग जाते हैं,
जिस कारण हम कहीं न कहीं खुद को भूल जाते हैं,
आज मैंने खुद से बातें की....
हर वक्त हमें कोई चाहिए होता है,
जो हमारी परवाह करें,
हमसे प्यार करे हमारा ध्यान रखें,
लेकिन कभी खुद से हम मिले नहीं,
इंसान सब मतलबी है,
जब तक काम है तब तक ही साथ है,
मुश्किलों में साथ छोड़ जाते,
पैसों के लिए जायदाद में बंटवारा तक हो जाते,
फिर भी हर वक्त कोई चाहिए होता,
जो हमसे बातें करें हमें समझे,
बातें करने को हजारों मिलेंगे सैकड़ों मिलते रहेंगे,
दुख बांटेंगे दुखों का दुखड़ा सुनाएंगे,
वक्त आने पर कोई साथ नहीं आएगा,
जब बस अपने ही काम आएंगे,
क्योंकि रिश्तों में बेशक तकरार हो सकती है,
पर रिश्ते कभी पराए नहीं होते,
जेठानी चाहे कितनी भी बुरी हो,
काम वक्त आने पर वही आती है,
कभी खुद से बातें की है ,नहीं...,
कभी समय नहीं मिला तो कभी,
सोचा खुद से क्या बातें करना,
अक्सर हम यही कहते हैं,
पर सच तो यह है,
जो हम खुद से कह सकते हैं,
वो किसी से नहीं बोल सकते हैं,
खुद की गलतियों का एहसास रहता है,
पर किसी के सामने उजागर नहीं करते,
क्योंकि अक्सर हमें भय रहता है,
कोई हमारे बारे में क्या सोचेगा।
