कशिश
कशिश
इक कशिश से हो तुम
के प्यार का ये सिलसिला खत्म नही होता
गुजर जाती है सारी सारी रात करवटो मे
पर यादो का ये सिलसिला खत्म नही होता..
एक जुनून से हो तुम
के तेरे प्यार का मकसद खतम नही होता.
दीदार कर के भी तरसू मैं
तेरे इन्तजार का सिलसिला खत्म नही होता।

